नव रात्रा का आठवां दिन महा गौरी



नव रात्रा का आठवां दिन महा गौरी 



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महागौरी माता का मंत्र : -


श्वेते   वृषे   सम  रूढा  श्वेताम्बरा  धरा   शुचिः ।

महा    गौरी    शुभं   दद्यान्महादेव    प्रमोददा ।।


या  देवी  सर्व  भू‍तेषु  माँ  गौरी  रूपेण  संस्थिता ।

नमस्तस्यै   नमस्तस्यै   नमस्तस्यै   नमो  नम: ।।


नवरात्रा में माता दुर्गा देवी की उपासना की जाती है !  यह नों  दिन तक चलती है ! माता दुर्गा की आठवीं स्वरूप का नाम है !  "महागौरी"  इस माता का वर्ण पूर्णत: गौर  है ! महागौरी माता की उपमा शंख, चक्र, चन्द्र , और कुंद  के फूल से की गई है !  इनकी आयु आठ वर्ष की मानी गई है ! 'अष्ट वर्षा भावेद गौरी' ! माता महागौरी के समस्त वस्त्र और आभूषण आदि भी सफेद है !  माता महागौरी के चार भुजाएं है !

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  माता के ऊपर दाहिने हाथ में अभय - मुद्रा में है ! और नीचे का दाहिने हाथ में त्रिशूल है ! तथा ऊपर के बाएं हाथ में डमरू है ! और नीचे की बाएं हाथ वर -  मुद्रा  है ! माता महागौरी की मुद्रा बहुत शांत है ! माता का वाहन वृषभ है !   माता ने पार्वती के रूप में इन्होंने भगवान शिव को पति के रुप में प्राप्त करने के लिए माता ने बड़ी कठोर तपस्या की थी !

माता की प्रतिज्ञा थी ! ' व्रिये अहं  वरदं शम्भुं नान्यं देवं महेश्वरात्' ! गोस्वामी तुलसीदास जी के अनुसार भी इन्होंने भगवान शिव के वर्ण के लिए कठोर संकल्प लिया था ! माता महागौरी ने इतनी कठोर तपस्या की थी ! जिससे उसका सारा शरीर एकदम काला पड़ गया था !  माता की तपस्या से भगवान शिव प्रसन्न हो गए ! जब भगवान शिव ने इसका शरीर को गंगा जी के पवित्र जल से धोया तब वह विधुत  प्रवाह के समान अत्यंत कांतिमान - गौर हो गया ! तभी  से इस माता का नाम महागौरी हुआ था !


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दुर्गा पूजा के आठवें दिन महागौरी की उपासना का विधान है !  माता की शक्ति अमोघ  और सध: फलदायिनी है !  माता की उपासना करने से भक्तों के समस्त पाप धुल जाते हैं !  और पूर्व संचित पाप नष्ट हो जाते हैं !  और भविष्य में भी पाप संताप ,दैन्य - दुःख  उसके पास कभी नहीं आते है !  माता की उपासना सभी प्रकार से पवित्र और अक्षय पुण्यों का अधिकारी हो जाते हैं !

महागौरी माता का ध्यान - स्मरण  करना पूजा - आराधना करते रहना भक्त के लिए बहुत कल्याणकारी है !  इसलिए हमेशा माता महागौरी का ध्यान करते रहना चाहिए !  माता की कृपा से अलौकिक सिद्धियों की  प्राप्त होते है !  मन को अनन्य भाव से एकनिष्ठ करके मनुष्य सदैव इनके पदार्विन्दों का ध्यान करना चाहिए !  यह माता अपने भक्तों के कष्ट को अवश्य ही दूर करती हैं !

माता की उपासना करने वाले भक्तों के असंभव कार्य भी संभव हो जाते  है !  इसलिए माता के चरणों की शरण पाने के लिए भक्तों को पूरे प्रयत्न करते रहना चाहिए !  पुराणों में भी माता की महिमा का पूरा आख्यान  किया गया है !वे  मनुष्य की वृतियों  को सत् की ओर प्रेरित कर के असत् को  नष्ट करती है ! इसलिए  हमें सच्चे भाव से   सदैव माता महागौरी के शरण गत  बनाना चाहिए !


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माता महा गौरी का ध्यान निम्न मंत्रो का उचारण करके किया जाता है - 


वन्दे     वांछित     कामार्थे      चन्द्रार्घकृत     शेखराम् ।

सिंहरूढ़ा    चतुर्भुजा   महा   गौरी        यश    स्वनीम् ॥


पूर्णन्दु  निभां  गौरी सोम चक्रस्थितां अष्टमं महा गौरी त्रिनेत्राम् ।

वरा  भीति   करां   त्रिशूल  डमरू  धरां महा  गौरी    भजेम् ॥


पटाम्बर    परि  धानां मृदु   हास्या नाना  लंकार   भूषिताम् ।

मंजीर,      हार,     केयूर    किंकिणी    रत्न  कुण्डल  मण्डिताम् ॥


प्रफुल्ल  वंदना पल्ल्वा  धरां  कातं  कपोलां  त्रैलोक्य  मोहनम् ।

कमनीया    लावण्यां     मृणांल    चंदन  गंध     लिप्ताम् ॥


माता महा गौरी का पाठ स्तोत्र निम्न मंत्रो का उचारण करके किया जाता है - 


सर्व  संकट   हंत्री   त्वंहि   धन     ऐश्वर्य    प्रदायनीम् ।

ज्ञानदा    चतुर्वेदमयी   महा   गौरी   प्रण  माभ्य   हम् ॥


सुख     शान्ति    दात्री     धन    धान्य    प्रदीयनीम् ।

डमरू  वाद्य  प्रिया  अद्या  महा  गौरी   प्रण  माभ्यहम् ॥


त्रैलोक्य     मंगल     त्वंहि    ताप  त्रय     हारिणीम् ।

वददं   चैतन्य   मयी     महा  गौरी   प्रण   माम्यहम् ॥



माता  महा गौरी  का कवच का मंत्र का उचारण -



ओंकारः   पातु    शीर्षो   मां,    हीं   बीजं   मां,    हृदयो ।

क्लीं   बीजं   सदा   पातु  नभो   गृहो    च   पादयो ॥


ललाटं   कर्णो   हुं   बीजं  पातु महा गौरी मां नेत्रं घ्राणो ।

कपोत   चिबुको  फट्   पातु   स्वाहा   मा सर्व  वदनो ॥


एक बात और भी ध्यान में रखने की है जब कोई भी नव रात्रा के दिनों में व्रत - उपवास करते है ! तो उसको जरूर ही दुर्गा सप्त शती का पाठ करना चाहिए ऐसा करने से बाधाये भी दूर होती है ! अपने घर में सुख - शांति भी बनी रहती है और मनुष्य की मनो कामना भी पूरी होती है ! इस लिए यह सब जानकर जरुर ही दुर्गा सप्त शती का पाठ अवश्य ही करना चाहिए !


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