श्री रामायण जी की आरती



                                     श्री रामायण जी की आरती 


RAMAYAN JI KI ARTI


आज श्री रामायण जी की आरती की आरती के बारे में जानेगें क्योकि यह Arti भी बहुत महत्व पूर्ण है ! हर जगह - जगह आजकल  रामायण पाठ होते रहते है ! और आगे भी इस प्रकार आज की तरह आपकी सहायता करता रहूँगा !


हिंदू  धर्म में अनेक प्रकार के धार्मिक कार्य किये जाते है जैसे - की कोई आदमी रोज सुबह - सुबह अपने नित्य कर्म जो की सुबह  जल्दी उठ कर स्नान आदि काम करके भगवान के मंदिर में जाकर  भगवन की भक्ति करता और भगवन के दर्शन करता है ! और कोई सुबह के समये में अपने काम धंधे को शुरू करने से पहले भी भगवान को याद करता है ! यह रोजाना का कर्म होता है ! 


कब करनी चाहिए रामायण जी की आरती -


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जब किसी व्यक्ति में मन में इच्छा हो जाये की आज हमें श्री रामायण जी की आरती करनी है ! तब भी श्री रामायण जी की आरती कर सकते है ! या भगवान श्री रामचंद्र जी के मंदिर में रोज सुबह - शाम भी कर सकते है ! और यह सब मनुष्य के ऊपर भी है की उसमे कितनी भगवान के प्रति आस्था है ! और जब कोई रामायण पाठ आदि कार्य करता है तब भी उसे श्रदा के साथ श्री रामायण जी की आरती कर सकते है ! यह तो बहुत अच्छी बात है ! कि आदमी को भगवान कि शरण में जाना चाहिए ! वहाँ पर उसको कुछ नया सीखने को जरुर ही मिलेगा !


श्री रामायण जी की आरती करने से पहले ये मंत्र भी जरूर बोले -


कर्पूर गौरं करुणाव तारं संसार सारं भुजगेन्द्र हारम्  !
सदा वसंतं हृदयारविन्दे , भवं भवानी सहितं नमामि !!
      
         
   !!श्री रामायण जी की आरती !!


आरती    श्री     रामायण    जी    की !
कीरत     कलित   ललित   सिय   पी   की !!


गावत        ब्रह्मादिक        मुनि         नारद !
बाल  मीक        बिग्यान       बिसारद  !!


सुक   सन   कादिक    सेष    अरु    सारद !
बरनि    पवन    सुत      कीरति   नीकी !!


आरती    श्री      रामायण   जी    की !
कीरत    कलित     ललित   सिय   पी   की !!


गावत     बेद      पुरान        अष्टदस !
छओ      सास्त्र     ग्रंथन     को   रस !! 


मुनि  जन  धन  संतन  को     सब रस !
सार   अंस       संमत      सबही      की !!


आरती     श्री     रामायण    जी    की !
कीरत    कलित    ललित    सिय   पी   की !!


गावत         संतन            संभु        भवानी !
अरु   घट      संभव   मुनि      बिग्यानी !!


ब्यास    आदि      कबि  बर्ज     बखानी !
काग  भुसुंडी    गरुड़   के  ही   की !!


आरती        श्री      रामायण      जी       की !
कीरत    कलित    ललित   सिय   पी    की !!


कलि   मल    हरनि    विषय    रस    फीकी !
सुलभ     सिंगार     मुक्ति     जुबती     की !!


दलन  रोग     भव     मूरी      अमी   की !
तात मात   सब   बिधि   तुलसी    की !!


आरती    श्री     रामायण    जी     की !
कीरत    कलित    ललित   सिय   पी  की !!
              
                      !! समाप्त !!

ऊपर लिखी हुई रामायण जी की पूरी आरती है ! इसमे देखकर पढ़ सकते है ! और  जब कोई आरती गाता है | तो उसको पहली व दूसरी लाइन को कई बार गाना पड़ता है ! वो भी इस हिसाब से ही आरती में लिखी हुई है ! अथार्त इस आरती को ज्यो -त्यों ही गा सकते है ! 

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